बिना आपकी लिखि‍त इजाजत ओवरटाइम नहीं करा पाएंगी कंपनियां, मिलेगा दोगुना वेतन

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पेशेगत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा पर संहिता 2019 में यह प्रस्ताव किया गया है कि यदि किसी कर्मचारी से ओवरटाइम कराया जाता है, तो उसे इस अवधि के लिए दोगुना मजदूरी या वेतन दिया जाए.

मोदी सरकार का प्रस्ताव अगर लागू हुआ तो सभी कंपनियां और प्रतिष्ठान कर्मचारी की लिखित मंजूरी के बिना उससे ओवरटाइम नहीं करा पाएंगी. यही नहीं, अगर वे ओवरटाइम कराएंगी तो उन्हें इस अवधि के लिए दोगुना मेहनताना भी देना होगा.

पेशेगत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा पर संहिता 2019 में यह प्रस्ताव किया गया है कि यदि किसी कर्मचारी से ओवरटाइम कराया जाता है, तो उसे इस अवधि के लिए दोगुना वेज या वेतन दिया जाए. इसमें बेसिक पे, महंगाई भत्ता और रिटेन्शन पे शामिल होंगे. इस बारे में एक बिल केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने पिछले हफ्ते पेश किया. इस प्रस्ताव में कहा गया है, ‘एम्प्लॉयर किसी भी कर्मचारी से बिना उसकी लिखित इजाजत के ओवरटाइम नहीं कराएगा.’

नेशनल स्टैटिस्ट‍िकल ऑफिस (NSO) के पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे 2017-18 के मुताबिक, देश में ज्यादातर कामगार हफ्ते में 48 घंटे से ज्यादा काम करते हैं, जो कि अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा निर्धारित समय सीमा से ज्यादा है. सर्वे के मुताबिक वेतनभोगी या नियमित कर्मी हफ्ते में 53 से 56 घंटे तक काम करते हैं. इसी प्रकार स्वरोजगार में लगे लोग हफ्ते में 46 से 54 घंटे और कैजुअल वर्कर 43 से 48 घंटे तक काम करते हैं.

सरकार इस प्रस्ताव के द्वारा उस पूर्व प्रस्ताव को हटा रही है, जिसके मुताबिक किसी कर्मचारी से ओवरटाइम काम कराने की इजाजत मिली हुई थी.

इस बिल के प्रारूप को पिछले साल जनता की राय के लिए सार्वजनिक किया गया था. इसमें कहा गया था कि एक दिन में 10 घंटे से ज्यादा का काम नहीं कराया जा सकता, लेकिन मौजूदा बिल में इस प्रावधान को नहीं शामिल किया गया है.

न्यूनतम वेतन तय करने का भी प्रस्ताव

गौरतलब है कि बरसों की कोशिशों के बाद केंद्र सरकार ने एक बार फिर मजदूरों की हितों की रक्षा के लिए संगठित और गैरसंगठित सेक्टर में श्रम कानून सुधार बिल 2019 के जरिए न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का फैसला लिया है. पिछली बार ऐसी कोशिश 2017 में हुई थी जब लोकसभा में रखा गया था और फिर इसे स्टैंडिंग कमेटी को भेजा गया लेकिन ये कभी पास नहीं हो सका.

इस बिल में श्रमिकों के वेतन से जुड़े चार मौजूदा कानूनों-पेमेंट्स ऑफ वेजेस एक्ट-1936, मिनिमम वेजेस एक्ट-1949, पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट-1965 और इक्वल रेमुनरेशन एक्ट-1976 को एक कोड में शामिल करने की तैयारी है. कोड ऑन वेजेज में न्यूनतम मजदूरी को हर जगह एक समान लागू करने का प्रावधान है. इससे हर श्रमिक को पूरे देश में एक सामान वेतन सुनिश्चित किया जा सके.

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