समाचार, पंजाब

मुख्य सचिव द्वारा पराली जलाने की घटनाएं रोकने के लिए सभी डिप्टी कमीशनरों को हिदायतें जारी

पराली प्रबंधन संबंधी राज्य के उच्च अधिकारियों के साथ समीक्षा मीटिंग
 
चंडीगढ़, 22 सितम्बर :-  
 
पंजाब के मुख्य सचिव विजय कुमार जंजूआ ने सभी डिप्टी कमीशनरों को ज़ोर देकर कहा है कि पराली जलाने की घटनाओं को हर हाल में रोकने के लिए वह अपने- अपने जिलों में योग्य प्रबंध करें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की तरफ से किसानों को जागरूक करने के लिए विशेष यत्न किये जा रहे हैं। पराली और अवशेष जलाने की दर को और कम करने और पराली प्रबंधन के लिए हैपी सिडर और ऐसे अन्य यंत्रों/मशीनों की खरीद के लिए किसानों की वित्तीय मदद की जा रही है।
पंजाब के सभी डिप्टी कमीशनरों और उच्च अधिकारियों के साथ मीटिंग की अध्यक्षता करते हुये मुख्य सचिव ने कहा कि वातावरण दूषित होने से बचाने के लिए राज्य सरकार पराली को जलाने की जगह इसके प्रबंधन की तरफ विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को समझाया जाये कि यदि पराली जलाने वाले किसी किसान के राजस्व रिकार्ड में रैड्ड एंट्री हो जाती है तो इससे वह बहुत सी सरकारी स्कीमों और योजनाएं प्राप्त करने से वंचित हो सकता है। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से उत्तरी भारत में जो प्रदूषण का स्तर बढ़ता है, उससे पंजाब को राष्ट्रीय स्तर पर बदनामी झेलनी पड़ती है, इसलिए किसानों को हर हाल में पराली जलाने की जगह उसके प्रबंधन के लिए समझाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हालाँकि पराली न जलाने सम्बन्धी कानून भी बना हुआ है परन्तु इसके बावजूद कई स्थानों से पराली जलाने की घटनाएँ रिपोर्ट हो रही हैं। एक- एक जि़ले के पराली प्रबंधन और मशीनों की वितरण सम्बन्धी समीक्षा करते हुये मुख्य सचिव ने कहा कि जि़ला प्रशासन वातावरण संभाल के लिए किसानों को अलग-अलग माध्यमों के द्वारा जागरूक करे और उनको समझाए कि पराली और अवशेष जलाने का कितना ज़्यादा नुक्सान है।
मुख्य सचिव ने कहा कि जिन गाँवों में पहले भी फसलों के अवशेष को आग लगाने के मामले सामने आए हैं, वहाँ प्रशासन ज़्यादा चौकसी इस्तेमाल करे। उन्होंने कहा कि किसानों को स्कूलों में पढ़ते बच्चों के द्वारा भी समझाया जाये कि पराली को आग लाने से बच्चों को ‘ गंदा और प्रदूषित’ भविष्य मिलेगा। डिप्टी कमीशनरों को निर्देश देते हुये मुख्य सचिव ने कहा कि इस साल पराली जलाने के मामले हर हालत में रोके जाएँ और इस संबंधी कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी।
मीटिंग में सभी डिप्टी कमीशनरों के इलावा कृषि विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, राजस्व विभाग और प्रदूषण बोर्ड के उच्च अधिकारी उपस्थित थे।
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